शुक्रवार, 21 जून 2019
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सीबीआई से एक यथा-स्थिति रिपोर्ट मांगी
नई दिल्ली, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से एक यथा-स्थिति रिपोर्ट मांगी है, जो उसने अब तक वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंग और आनंद ग्रोवर के नेतृत्व में संचालित एनजीओ के संबंध में है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, सीबीआई के जांच को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए किए गए शिकायत की जांच कर रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एनजीओ के खिलाफ कोई ताजा सबूत नहीं है।
कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के वरिष्ठ सलाहकार मेजर दारूवाला और ह्यूमन राइट्स डिफेंडर के हेन्री टीशाग्ने द्वारा शिकायत दर्ज की गई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत में, दारूवाला ने दावा किया कि जयसिंह और ग्रोवर को उनके विधिक पेशे से संबंधित कार्यों के लिए प्रताडि़त किया जा रहा था। उसने यह भी दावा किया कि सरकार की नीतियों को चुनौती देने वाले व्यक्ति को डराने का यह एक स्पष्ट उदाहरण था।
शुक्रवार को जारी एक बयान में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यह मुद्दा उसके कार्यक्षेत्र से परे था क्योंकि यह विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के कथित उल्लंघन से संबंधित था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सीबीआई को चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। हम आपको बता देवें कि जयसिंह और ग्रोवर, दोनों वरिष्ठ अधिवक्ता मानव अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करते है। ग्रोवर समलैंगिकों के अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करते हैं।
सीबीआई ने एनजीओ और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ 13 जून को आईपीसी, एफसीआरए और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। दोनों शिकायतें इस तथ्य का उल्लेख करती हैं कि प्राथमिकी 2016 के गृह मंत्रालय की रिपोर्ट पर आधारित थी और तब से परिस्थितियों में कोई भौतिक परिवर्तन नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गैर सरकारी संगठन के खिलाफ आपराधिक मामलों में एफआईआर दर्ज किया जाना एक प्रकार से धमकाने का प्रयास है।
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