छत्तीसगढ़ भाजपा के कद्दावर नेता पंकज कुमार झा ने ट्वीट किया है कि "लालू यादव से एक पत्रकार ने पूछा था कि आपने नौ बच्चे क्यों पैदा किए? यादव का जवाब था - वे लोग कांग्रेस विरोध की राजनीति कर रहे थे। कांग्रेस सरकार ने तब जनसंख्या नियंत्रण का अभियान चलाया हुआ था, उसी के विरोध में हमने यह किया।"
आगे उन्होंने ट्वीट करके पूछा है कि क्या आपको बिहार के ‘जनसंख्या आपातकाल’ के बारे में पता है? बिहार में जनसंख्या का घनत्व राष्ट्रीय औसत से तीन गुना ज़्यादा है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से वहां का जनसंख्या घनत्व 6 गुना ज़्यादा है। (छग-189, बिहार 1105.)
यह घनत्व तब है जबकि आधे से ज़्यादा लोग राज्य से बाहर रहते हैं। देश और दुनिया के शहर पटे पड़े हैं बिहारियों से, और हम मुट्ठी भर आइएएस होने के घमंड से अकड़े रहते हैं। हमारा उन्माद जब ज़्यादा बढ़ता है तो हम चाणक्य-चंद्रगुप्त रटने लगते हैं। गोया ‘इतिहास’ ही हमारे दिमाग़ी बुखार का अकेला इलाज हो। हम इतने घिनौने हैं कि लालू-रबड़ी-तेजप्रताप-तेजस्वी तक को अपना सीएम-डेप्युटी सीएम चुनते रहते हैं।
उपाय? कोई इलाज है भारत की इस चमकी बिमारी का? जी... है शायद। इलाज यह कि...
बिहार में पांच वर्ष के लिये राष्ट्रपति शासन लगा दीजिए। पूर्व सेनाध्यक्ष या सेना को कोई बड़ा पूर्व अधिकारी राज्यपाल नियुक्त किये जायें। उनके सलाहकारों में भी सेना से लोग ही हों। साथ ही एक-दो जनसंख्या विशेषज्ञ भी। एक तरह के ‘मार्शल लॉ’ जैसी स्थिति बनाइये बिहार में।
फिर सम्पूर्ण क्रूरता तथा कठोरता के साथ जनसंख्या नियंत्रण कीजिए। पर्यावरण रक्षण, पानी आदि की सुरक्षा जैसे कार्य भी निर्ममता के साथ किये जायें। बिहार के हालात लल्लुओं ने जम्मू-कश्मीर से ज़्यादा ख़राब बना दिये हैं। राजेंद्र बाबू के प्रदेश में एक अलग तरह के सैन्य ऑपरेशन की ज़रूरत है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें