
दक्षिणापथ,आरंग।छत्तीसगढ़ के किसान को कौन न्याय दिलावेगा..? किसान बेजुबान पशु है जो बोल नही सकता लेकिन अन्याय को सहन करते रहता है…यह बरसो से चली आ रही एक परम्परा ही तो है… किसानों ने कलेक्टर, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर खेतो में बिना अनुमति के लगाये गये बिजली खंभे के सम्बंध में न्याय दिलाने के लिये गुहार लगाया गया…लेकिन अब तक न्याय नही मिला… छत्तीसगढ़ बिजली विभाग अपने व्यवसायिक हित के लिये किसानों के खेतों व खलिहान में किसानों के बिना सहमति से सरकारी आदेश का डर दिखाकर बिजली खम्भा को लगाया जाता है।। किसानों के कृषि भूमि में बिजली खम्भा लगाये जाने से विभिन्न प्रकार की असुविधा परेशानी व जोखिम बना रहता है। किसानों ने बताया कि खेतो में बिजली खम्भा रहने से खेती-किसानी के कार्य मे भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है जैसे ट्रेक्टर से धान बोआई में, बियासी करने में, हार्वेस्टर से धान कटाई में होता है और साथ ही आंशिक रुप से उत्पादन भी प्रभावित होता है। बरसात के समय तेज हवा पानी से जीवन जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। जिस खेत मे बिजली खम्भा रहता है उस खेत मे खेती-किसानी का कार्य भी भय के वातावरण में होता है। बिजली विभाग द्वारा प्रतिवर्ष जून-जुलाई में मेंटेनेंस के बहाने बिजली खम्भा व बिजली तार के आस-पास उपयोगी पेड़ को भी बिना अनुमति के काटकर वही पर छोड़ दिया जाता है इससे भी किसान को असुविधा व नुकसान दोनो होता है।। किसानों ने पुनः न्याय की गुहार लगाकर इस विषय पर गम्भीरता के साथ पहल करने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से की है।
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