मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

हर सात में से एक भारतीय मानसिक रोग से ग्रस्त

देश में मानसिक रुप से बीमार लोगों की संख्या चिंताजनक रुप से बढ़ती जा रही है। आईसीएमआर और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब  19.73 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी के शिकार हैं। इनमें डिप्रेशन और एंजाइटी के मामले सबसे ज्यादा है। आईसीएमआर ने 1990 से 2017 तक मानसिक विकारों के ट्रेंड पर किए गए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
इसके अलावा सिजोफ्रेनिया, बायोपोलर डिसआर्डर, इंडियोपैथिक, आटिज्म और इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटी के मामले भी बढ़ रहे है। यह संख्या पूरी आबादी की 14.3 फीसदी है जो किसी भी देश के लिए चिंता की वजह हो सकती है। इनमें 4.57 करोड़ लोग अवसाद और 4.49 करोड़ लोग किसी न किसी बात की चिंता यानि एंजाइटी के शिकार है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इन बीमारियों का प्रसार भारत में बढ़ रहा है।

आईसीएमआर की एक रिपोर्ट ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिसीज स्टडी 2017 में दावा किया गया है कि कुल मानसिक बीमारियों में डिप्रेशन या मानसिक अवसाद की भूमिका सबसे ज्यादा है। यह लगभग 33.8 फीसदी है। इसके बाद 19 फीसदी आंकड़े के साथ एंजाइटी दूसरी सबसे बड़ी मानसिक समस्या है जो लोगों को परेशान कर रही है। बौद्धिक दिव्यांगता के भी 10.8 फीसदी मरीज इसका बड़ा हिस्सा हैं।

वहीं सीजोफ्रेनिया के 9.8 फीसदी मरीज मानसिक बीमारी के शिकार बताए गए हैं। अय्धयन में ये भी बात सामने आई है कि अधे़ड़ लोग डिप्रेशन से ज्यादा पीड़ित है, जो भारत में बुढ़ापे की तरफ बढ़ती आबादी को लेकर चिंता को दिखाती है। साथ ही इसमें कहा गया है कि अवसाद का संबंध भारत में आत्महत्या के कारण होने वाली मौतों से भी है। बचपन में ही मानसिक विकार की गिरफ्त में आनेवाली उत्तरी राज्यों में संख्या अधिक है।
आत्महत्या और मानसिक बीमारी के बीच सीधा संबंध पाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मानसिक बीमार लोग आत्महत्या के ज्यादा प्रयास करते हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि मानसिक रुप से बीमार महिलाएं पुरुषों की तुलना में आत्महत्या के ज्यादा प्रयास करती हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि महिलाओं में डिप्रेशन, एंजाइटी और खाने के विकार ज्यादा पाए गए हैं।

क्यों इलाज नहीं कराते लोग ?
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने रिपोर्ट जारी करने के मौके  पर कहा कि मानसिक बीमारी किसी भी दूसरी सामान्य बीमारियों की तरह का एक शारीरिक विकार है जिसे उचित इलाज के जरिए दूर किया जा सकता है। विभिन्न कारणों से यह किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। लेकिन जागरुकता की कमी के कारण मानसिक बीमारी को लोग पागलपन से जोड़कर देखते हैं।
इसी डर से इलाज कराने से भी बचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर एक बार मानसिक बीमारी का इलाज करवाया जाए तो लोग उन्हें पागल समझने लगेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को इस भ्रांति से बचने के साथ-साथ किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या होने पर अच्छे मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

नितेन्द्र सिंह


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