सरकार के पेश मसौदा प्रस्ताव के समर्थन में 358 मत पड़े, जबकि विरोध में 234 सांसदों ने मत दिए. इसके साथ ही 31 जनवरी, 2020 से ईयू से ब्रिटेन के अलगाव का रास्ता साफ हो गया.
गौरतलब है कि पूर्ववर्ती कंजरवेटिव सरकार बहुमत के अभाव में इस प्रस्ताव को संसद में पारित कराने में चार बार विफल रही थी. तीन बार विफल रहने पर टेरीजा मे को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
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